भब्य जलसे के बीच 192 छात्रों का हुआ दस्तार-ए-बंदी

इल्म खजाने की वो चाभी हैं जिससे खुलते हैं तरक्की के सभी तालें

सुरूरे इल्म हैं कैफे शराब से बेहतर

कोई रफीक नहीं हैं किताब से बेहतर

बस्ती-

विकास क्षेत्र साऊंघाट की सवसे बड़ी ग्राम पंचायत जमदाशाही में रविवार की देर रात्रि एक भव्य जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें दारूल उलूम अलिमिया मदरसें के 192 छात्रों को वार्षिक दीक्षान्त समारोह में हिफ्ज, आलमियत, फजीलत एवं किरत की डिग्रिया साफा बांधकर प्रदान किया गया। दीक्षान्त समारोह में देश प्रदेश के जाने माने उलमा-ए-कराम व शायर पहुँच कर वाहवाही बटोरी।
मौलाना खालिद अय्यूब सिरानी राजस्थान ने अपने तकरीर के माध्यम से कहा कि दारूल उलूम अलिमिया दीनी तालीम के साथ ही देश विदेश के कोने में अलीमी नाम को रौशन कर आगे बढ़ रहा हैं। प्रदेश के दो-चार मदरसो के वाद दारूल उलूम अलिमिया जमदाशाही का ही नाम रौशन हो रहा हैं। कहा कि दारूल उलूम अपनी इल्म की रौशनी पुरी दुनिया के छात्रों के बीच पहुँचा रहा हैं। यहाँ से डिग्री लेकर निकलने वाला छात्र अपनी इल्म का आला हजरत के चिराग का बेहतर प्रदर्शन कर रहा हैं। कहा कि इल्म नूर हैं जिसके पास होता हैं, वह रौशन होता है। इल्म को अपने सीने से लगा कर रखें। कहा कि घर घर से जेहालत को उखाड़ फेकें और इल्मों हुनर से सभी को भर दे, ऐसा है दारूल उलूम अलिमिया जमदाशाही का ये मदरसा। कहा कि इल्म दुनिया की वो ताकत हैं, जिससे सभी दिल से जीता जा सकता हैं। विना इल्म के किसी भी कौम की तरक्की नही हो सकती हैं। पैगाम दिया कि इल्म कोई भी हो उसे हासिल करें। फरमाया कि आप अपने बच्चों को आधी रोटी खाकर इल्म की तामिल अवश्य दिलाएं। अपने बच्चों के साथ ही अपने आस पास के भी बच्चों की फीस, कापी, किताब व ड्रेस आदि की व्यवस्था देकर शिक्षा रूपी ताकत दिलाएं। शेर के माध्यम से समझाया कि,
सुरूरे इल्म हैं, कैफे शराब से बेहतर,
कोई रफीक नहीं हैं, किताब से बेहतर।।
मौलाना गुलाम रब्बानी उन्नाव ने कहा कि फकीर, मुफ्ती, दीन का आलिम वहीं बनता हैं जिसे अल्लाह का फजल कर्म होता हैं। इमामें आदम की कितावों को जिसने भी पढ़ा है, वो इल्म की बुलंदियों को प्राप्त किया हैं। इल्म इल्में मदीना हैं। कहा कि इस मदरसे में देश प्रदेश के छात्र यहॉ आकर फजिलत, आलमियत, हिफ्ज कुरान एवं करात कुरान की पढ़ाई पुरा कर दारूल उलूम का नाम रौशन करते हैं।
मौलाना मसूद बरकाती आज़मगढ़ एवं मौलाना मुफ्ती कमरे आलम किछौछे ने कहा कि दारूल उलूम अलिमिया ने अपने इन छात्रों के सिर पर इल्म का ताज रखा हैं, जो फक्र की बात हैं। कहा कि जमींनो पर कब्जा करना आसान हैं पर दिलों पर नहीं। दिल अमानत हैं, दीन हैं, इल्म हैं, इस्लाम का फरमान हैं। इसी तरह से अन्य उलमा ए कराम एवं शायरों द्वारा बेहतरीन तकरीर व कल्मात पेश कर कौम को जगाने का काम किया गया। सबकों अम्नो अमान मेल जोल से रहने का तरीका बताया गया हैं। अंत में जलसा-ए-दस्तार बंदी में फजीलत, आलमियत, हिफ्ज तथा करात के कुल 192 छात्रों के सिर पर साफा बांधकर दस्तार-ए-बंदी किया गया हैं। कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती निजामुददीन ने किया तथा आयोजक प्रभारी प्रधानाचार्य मौलाना मो० उम्मीद अली सिददीक रहें हैं।
इस कार्यक्रम में मौलाना मोहम्मद अहमद रजा बगदादी, मास्टर अबूजर ऊर्फ नन्हें, तनवीर बाबा, कुमेल अहमद, सुहेल अहमद, शकील अहमद आदि का विशेष सहयोग रहा हैं।

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